हिंदू धर्म में सफ़ेद रंग का महत्व: पवित्रता से परम शांति तक

हिंदू धर्म में सफ़ेद रंग का महत्व: पवित्रता से परम शांति तक
December 10, 2025
Dieties/devta gan
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हिंदू धर्म में सफ़ेद रंग का महत्व: पवित्रता से परम शांति तक

हिंदू धर्म में सफ़ेद रंग पवित्रता, शांति और आध्यात्मिक स्वच्छता का प्रतीक माना जाता है। देवी सरस्वती की निर्मल छवि से लेकर पूजा के दौरान पहने जाने वाले सफ़ेद वस्त्र तक, यह रंग सत्य, सदभाव और वैराग्य का द्योतक है। यह मन को अहंकार और नकारात्मकता से मुक्त कर, साधक को आंतरिक शांति और ज्ञान की ओर ले जाता है।
भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ रंगों से भरी हुई हैं, लेकिन इनमें से सफ़ेद रंग का स्थान सबसे विशिष्ट और पवित्र माना जाता है। सफ़ेद सिर्फ़ एक रंग नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, सत्य और शांति का गहरा संदेश देने वाला प्रतीक है। हिंदू धर्म में यह रंग जीवन के हर चरण—पूजा, साधना, ज्ञान, और यहाँ तक कि मृत्यु—से जुड़ा हुआ है।

1. पवित्रता का प्रतीक

सफ़ेद रंग को “शुद्धता” का प्रतीक माना जाता है।
पूजा-पाठ के दौरान अक्सर पुरोहित सफ़ेद धोतियाँ पहनते हैं, जिससे मन और कर्म दोनों की पवित्रता का संदेश मिलता है।

चावल, दूध, और शंख जैसे कई पवित्र पदार्थ भी सफ़ेद होते हैं।

ये वस्तुएँ ईश्वर को अर्पित करने योग्य सबसे शुद्ध मानी जाती हैं।

यह रंग हमें याद दिलाता है कि आध्यात्मिक यात्रा मन की पवित्रता से शुरू होती है।

2. शांति और सौहार्द का द्योतक

सफ़ेद रंग मन को शांत करता है।
हिंदू धर्म में इसे “शांति” और “सद्भाव” का रंग माना गया है।

कई मंदिरों में सफ़ेद झंडे शांति का प्रतीक होते हैं।

ध्यान और योग के दौरान सफ़ेद वस्त्र पहनना मन को स्थिर करने में सहायक माना जाता है।

यह रंग हमें भीतर की स्थिरता और संतुलन की याद दिलाता है।

3. ज्ञान और सत्य का रंग

ज्ञान की देवी मां सरस्वती को हमेशा सफ़ेद वस्त्रों में दर्शाया जाता है।
उनका सफ़ेद कमल, हंस और वीणा सब पवित्रता, सत्य और निर्मल ज्ञान के प्रतीक हैं।

सफ़ेद रंग यहाँ केवल अध्ययन का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान का संकेत है—वह ज्ञान जो मन से अज्ञानता और भ्रम को दूर करता है।

4. सत्त्व गुण का प्रतिनिधि

हिंदू दर्शन में प्रकृति तीन गुणों से बनी मानी गई है—सत्त्व, रजस और तमस।
सत्त्व, जो पवित्रता, संतुलन और सत्य का प्रतिनिधित्व करता है, उसी का रंग है सफ़ेद।

सात्त्विक भोजन

सात्त्विक जीवन

और सात्त्विक विचार

इन सभी का प्रतीक है सफ़ेद रंग। यह मन को ऊँचे आध्यात्मिक स्तरों तक ले जाने में सहायक माना जाता है।

5. मृत्यु और वैराग्य में सफ़ेद का अर्थ
मृत्यु के समय

हिंदू समाज में शोक के दौरान सफ़ेद वस्त्र पहनना परंपरा है।
यह:

वैराग्य,

जीवन की अनित्यता का बोध,

और आत्मिक चिंतन का संकेत देता है।

सफ़ेद यहाँ दुःख नहीं बल्कि शांति और स्वीकार्यता का प्रतीक बन जाता है।

सन्यास और साधना

कई संत और योगी सफ़ेद वस्त्र पहनते हैं।
यह दर्शाता है कि उन्होंने:

संसारिक आसक्तियों का त्याग कर दिया है,

सादगी को अपनाया है,

और सत्य के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया है।

6. पूजा और अनुष्ठानों में महत्व

सफ़ेद रंग का प्रयोग लगभग हर धार्मिक संस्कार में होता है।

सफ़ेद फूलों का अर्पण

देवताओं की मूर्तियों को सफ़ेद कपड़े से ढकना

यज्ञोपवीत (जनेऊ) जैसे सफ़ेद धागे

ये सब पवित्रता, अनुशासन और आत्मिक शुद्धि के प्रतीक हैं।

7. सृष्टि की मूल अवस्था का प्रतीक

हिंदू दर्शन में सृष्टि की शुरुआत एक निर्मल, उज्ज्वल प्रकाश से मानी गई है, जो सफ़ेद के अत्यंत निकट है।
इसलिए सफ़ेद रंग को:

अनंत,

निराकार,

और परम सत्य

का प्रतीक माना जाता है।

हिंदू धर्म में सफ़ेद रंग सिर्फ़ एक रंग नहीं, बल्कि एक आदर्श जीवन दर्शन है।
यह पवित्रता, शांति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश देता है। पूजा के समय हो या शोक में, साधना में हो या रोज़मर्रा के जीवन में—सफ़ेद रंग हमेशा एक ही बात कहता है:

“मन को शुद्ध करो, सत्य को अपनाओ, और आत्मा को शांत रखो।”