हिंदू धर्म में पीले रंग का महत्व

हिंदू धर्म में पीले रंग का महत्व
December 30, 2025
Spirituality
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हिंदू धर्म में पीले रंग का महत्व

हिंदू धर्म में पीला केवल रंग नहीं है—यह ज्ञान, पवित्रता, समृद्धि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। भगवान विष्णु और देवी सरस्वती के वस्त्रों में यह रंग दिखाई देता है और अनुष्ठानों, त्योहारों तथा भेंटों में इसका प्रयोग किया जाता है। यह बुद्धिमत्ता, शुभता और आध्यात्मिक प्रबोधन का प्रतिनिधित्व करता है और भक्तों को सकारात्मकता और ईश्वरीय आशीर्वाद की ओर मार्गदर्शन करता है।
हिंदू धर्म में रंग केवल सजावट के लिए नहीं होते, बल्कि उनके पीछे गहरी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और मानसिक महत्व छिपा होता है। इनमें से पीला रंग विशेष रूप से पवित्र और शुभ माना जाता है। यह ज्ञान, बुद्धिमत्ता, समृद्धि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है और हिंदू धर्म के अनुष्ठानों, त्योहारों और देवी-देवताओं के चित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पीले रंग का प्रतीकात्मक महत्व
पीला रंग हिंदू धर्म में ज्ञान, प्रकाश और आत्मप्रबोधन का प्रतीक है। यह मन के विकास, बुद्धि के जागरण और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। पुराणों और शास्त्रों में पीले रंग को आध्यात्मिक प्रगति और दिव्यता से जोड़ा गया है।

भगवान विष्णु, ब्रह्मांड के पालक और रक्षक, अक्सर पीले वस्त्र पहने हुए दिखाई देते हैं, जो समृद्धि, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक है। इसी तरह, देवी सरस्वती, जो ज्ञान, कला और विद्या की देवी हैं, पीला रंग पहनती हैं, जो बौद्धिक विकास और शिक्षा के महत्व को दर्शाता है। पीला रंग मन की स्पष्टता, मानसिक फोकस और आत्मा के आलोक का प्रतिनिधित्व करता है।

अनुष्ठान और समारोह में पीला रंग
हिंदू अनुष्ठानों में पीला रंग अत्यंत शुभ माना जाता है। यह धार्मिक अनुष्ठानों, उत्सवों और महत्वपूर्ण जीवन घटनाओं में सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य आशीर्वाद लाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

वसंत पंचमी: यह त्यौहार देवी सरस्वती को समर्पित है और ज्ञान तथा विद्या का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले फूल चढ़ाना और पीले रंग से सजावट करना शुभ माना जाता है।

विवाह समारोह: हल्दी के अनुष्ठान में पीला रंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शुद्धिकरण, शुभता और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा का प्रतीक है।

गृह प्रवेश: नए घर में पीले फूल और सजावट का प्रयोग समृद्धि, खुशी और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए किया जाता है।

प्रकृति और भेंट में पीला रंग
हिंदू अनुष्ठानों में प्राकृतिक पीले रंग का भी विशेष महत्व है:

गेंदा का फूल: पूजा और मंदिरों की सजावट में प्रयोग किया जाता है। यह पवित्रता, भक्ति और आध्यात्मिक वृद्धि का प्रतीक है।

हल्दी (तुरmeric): यह केवल एक मसाला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शुद्धिकरण और सुरक्षा का प्रतीक है।

पीले फल और मिठाईयाँ: केले और लड्डू जैसे पीले रंग के फल और मिठाईयाँ समृद्धि और आशीर्वाद का प्रतीक होती हैं।

मानसिक और आध्यात्मिक महत्व
पीला रंग बुद्धि, स्पष्टता, सकारात्मकता और मानसिक जागरूकता को प्रोत्साहित करता है। योग और आयुर्वेद में यह सौर मंडल चक्र (मणिपुर चक्र) से जुड़ा है, जो आत्मविश्वास, व्यक्तिगत शक्ति और आत्मसम्मान को नियंत्रित करता है।

त्योहारों और मौसम में पीला रंग
पीला रंग वसंत और नए जीवन का प्रतीक भी है। वसंत पंचमी और होली जैसे उत्सवों में यह रंग जीवन की ऊर्जा, आनंद और नवीनीकरण का प्रतिनिधित्व करता है।

हिंदू धर्म में पीला रंग केवल रंग नहीं है, बल्कि यह दिव्यता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है। यह मानसिक स्पष्टता, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक विकास को प्रोत्साहित करता है। दैनिक जीवन और अनुष्ठानों में पीला रंग अपनाने से ज्ञान, शांति और आशीर्वाद घर और आत्मा में प्रवेश करता है।