March 27, 2026
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चैत्र नवरात्रि दिवस 8 (2026) – माँ महागौरी
माँ महागौरी देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं, जिनकी पूजा चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन की जाती है। वे शुद्धता, शांति और करुणा का प्रतीक हैं, जो पापों और नकारात्मकता को दूर करती हैं।
माँ महागौरी वृषभ (बैल) पर सवार होती हैं, सफेद वस्त्र धारण करती हैं और उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू होता है, जबकि वे अपने भक्तों को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद देती हैं।
परिचय:
चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन माँ महागौरी को समर्पित होता है, जो देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं। वे शुद्धता, शांति और ज्ञान का प्रतीक हैं। यह दिन आंतरिक शुद्धि और पिछले पापों व नकारात्मकता को दूर करने का संकेत देता है। भक्ति नाम के अनुसार, माँ महागौरी की पूजा करने से जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति आती है।
तिथि, नक्षत्र एवं पूजा मुहूर्त (2026):
साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन 26 मार्च, गुरुवार को मनाया जाएगा, जिसे अष्टमी तिथि कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में रहता है और बाद में मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करता है।
पूजा का शुभ समय प्रातः लगभग 06:00 बजे से 09:00 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त लगभग 12:00 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। संध्या पूजा का समय लगभग 06:15 बजे से 07:50 बजे तक है। समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
दिन 8: माँ महागौरी की पूजा:
माँ महागौरी का स्वरूप अत्यंत गौर (उज्ज्वल) और शांत है, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और करुणा तथा सौम्यता से परिपूर्ण हैं।
वे वृषभ (बैल) पर सवार होती हैं और उनके चार हाथ होते हैं—दो हाथों में त्रिशूल और डमरू होता है, जबकि अन्य दो हाथ अभय (रक्षा) और वरद (आशीर्वाद) मुद्रा में होते हैं।
भक्ति नाम के अनुसार, माँ महागौरी की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है, आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
माँ महागौरी की कथा:
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ महागौरी देवी पार्वती का ही एक रूप हैं। कहा जाता है कि उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।
उनकी कठोर तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गंगा जल से स्नान कराया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और गौर हो गया। तभी से वे महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
यह कथा भक्ति, धैर्य और आंतरिक शुद्धि की शक्ति को दर्शाती है।
पूजा विधि:
इस दिन भक्त प्रातः जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ या सफेद वस्त्र धारण करते हैं। पूजा स्थान को शुद्ध किया जाता है और माँ महागौरी को नारियल, मिठाई और दूध से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है।
भक्त दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करते हैं और व्रत रखते हैं। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है।
भक्ति नाम के अनुसार, सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में शांति, समृद्धि और सभी दुखों का नाश होता है।
माँ महागौरी के मंत्र:
बीज मंत्र:
“ॐ देवी महागौर्यै नमः”
ध्यान मंत्र:
“श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥”
इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में शुद्धता, शांति और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
आध्यात्मिक महत्व:
नवरात्रि का आठवां दिन शुद्धि और आध्यात्मिक स्पष्टता से जुड़ा होता है। माँ महागौरी की पूजा से मन और आत्मा शुद्ध होती है तथा नकारात्मकता और पिछले कर्मों का प्रभाव कम होता है।
भक्ति नाम के अनुसार, यह दिन हमें जीवन में सादगी, सत्य और पवित्रता अपनाने की प्रेरणा देता है, जिससे हम आंतरिक शांति और आत्मज्ञान की ओर बढ़ते हैं।
भक्तिनामा के साथ सभी प्रकार की पूजा के लिए अनुभवी पंडित ऑनलाइन बुक करें – आसान, विश्वसनीय और शुद्ध।
चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन माँ महागौरी को समर्पित होता है, जो देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं। वे शुद्धता, शांति और ज्ञान का प्रतीक हैं। यह दिन आंतरिक शुद्धि और पिछले पापों व नकारात्मकता को दूर करने का संकेत देता है। भक्ति नाम के अनुसार, माँ महागौरी की पूजा करने से जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति आती है।
तिथि, नक्षत्र एवं पूजा मुहूर्त (2026):
साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन 26 मार्च, गुरुवार को मनाया जाएगा, जिसे अष्टमी तिथि कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में रहता है और बाद में मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करता है।
पूजा का शुभ समय प्रातः लगभग 06:00 बजे से 09:00 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त लगभग 12:00 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। संध्या पूजा का समय लगभग 06:15 बजे से 07:50 बजे तक है। समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
दिन 8: माँ महागौरी की पूजा:
माँ महागौरी का स्वरूप अत्यंत गौर (उज्ज्वल) और शांत है, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और करुणा तथा सौम्यता से परिपूर्ण हैं।
वे वृषभ (बैल) पर सवार होती हैं और उनके चार हाथ होते हैं—दो हाथों में त्रिशूल और डमरू होता है, जबकि अन्य दो हाथ अभय (रक्षा) और वरद (आशीर्वाद) मुद्रा में होते हैं।
भक्ति नाम के अनुसार, माँ महागौरी की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है, आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
माँ महागौरी की कथा:
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ महागौरी देवी पार्वती का ही एक रूप हैं। कहा जाता है कि उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।
उनकी कठोर तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गंगा जल से स्नान कराया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और गौर हो गया। तभी से वे महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
यह कथा भक्ति, धैर्य और आंतरिक शुद्धि की शक्ति को दर्शाती है।
पूजा विधि:
इस दिन भक्त प्रातः जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ या सफेद वस्त्र धारण करते हैं। पूजा स्थान को शुद्ध किया जाता है और माँ महागौरी को नारियल, मिठाई और दूध से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है।
भक्त दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करते हैं और व्रत रखते हैं। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है।
भक्ति नाम के अनुसार, सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में शांति, समृद्धि और सभी दुखों का नाश होता है।
माँ महागौरी के मंत्र:
बीज मंत्र:
“ॐ देवी महागौर्यै नमः”
ध्यान मंत्र:
“श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥”
इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में शुद्धता, शांति और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
आध्यात्मिक महत्व:
नवरात्रि का आठवां दिन शुद्धि और आध्यात्मिक स्पष्टता से जुड़ा होता है। माँ महागौरी की पूजा से मन और आत्मा शुद्ध होती है तथा नकारात्मकता और पिछले कर्मों का प्रभाव कम होता है।
भक्ति नाम के अनुसार, यह दिन हमें जीवन में सादगी, सत्य और पवित्रता अपनाने की प्रेरणा देता है, जिससे हम आंतरिक शांति और आत्मज्ञान की ओर बढ़ते हैं।
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