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श्रावण मास 2026: तिथि, महत्व, सावन सोमवार, व्रत और पूजा विधि

श्रावण मास 2026: तिथि, महत्व, सावन सोमवार, व्रत और पूजा विधि
August 16, 2026
Maas/months of hindu calendar
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श्रावण मास 2026: तिथि, महत्व, सावन सोमवार, व्रत और पूजा विधि

Shravana Maas 2026 की तिथि, धार्मिक महत्व, Sawan Somwar, Shravan Vrat, Lord Shiva Puja Vidhi, प्रमुख त्योहार और सावन की पवित्र परंपराओं के बारे में जानें।
श्रावण मास, जिसे श्रावण माह, सावन या Sawan के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। यह महीना विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और मंदिरों में भगवान शिव की पूजा करते हैं।

श्रावण मास वर्षा ऋतु के दौरान आता है और प्रकृति में हरियाली तथा नवीनता का वातावरण दिखाई देता है। इस महीने में भगवान शिव के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और Sawan Somwar Vrat का विशेष महत्व माना जाता है।
श्रावण मास की तिथियां अलग-अलग क्षेत्रों में अपनाए जाने वाले हिंदू पंचांग के अनुसार अलग हो सकती हैं। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग और अन्य क्षेत्रों में प्रचलित अमांत पंचांग के कारण श्रावण की शुरुआत और समाप्ति की तारीखों में अंतर दिखाई देता है। इसलिए पूजा या व्रत के लिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि देखना उचित माना जाता है।

श्रावण मास क्यों महत्वपूर्ण है?

श्रावण मास का सबसे प्रमुख संबंध भगवान शिव से माना जाता है। हिंदू परंपरा में इस महीने में शिव की आराधना करने को विशेष फलदायी माना गया है।

श्रावण मास से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन की कथा प्रमुख है। समुद्र मंथन के दौरान जब भयंकर विष हलाहल निकला, तब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया। माता पार्वती ने विष को उनके शरीर में फैलने से रोक दिया।

भगवान शिव का यह त्याग, करुणा और सृष्टि की रक्षा का भाव श्रावण मास की आध्यात्मिक भावना से गहराई से जुड़ा हुआ है।
श्रावण मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

श्रावण मास को आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष समय माना जाता है। भक्त इस दौरान अपने जीवन में संयम और सकारात्मकता लाने का प्रयास करते हैं।

इस महीने में भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल, दूध और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। कई भक्त Om Namah Shivaya, महामृत्युंजय मंत्र और अन्य शिव मंत्रों का जाप करते हैं।
श्रावण का उद्देश्य केवल अधिक पूजा करना नहीं है, बल्कि मन को शांत करना, अनुशासन अपनाना, भक्ति को मजबूत करना और अपने आचरण में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

यदि भक्त घर से ही पारंपरिक पूजा करवाना चाहते हैं, तो Bhaktinama के Online Puja Booking और Online Pandit Booking जैसी सेवाएं इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बना सकती हैं।

Sawan Somwar का महत्व

श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को Sawan Somwar कहा जाता है और इसे भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, शिव मंदिर जाते हैं, शिवलिंग पर जल और अन्य पारंपरिक सामग्री अर्पित करते हैं तथा Om Namah Shivaya का जाप करते हैं।

कुछ लोग संपूर्ण उपवास रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं। व्रत की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती है।

अविवाहित भक्तों में Sawan Somwar Vrat को लेकर यह पारंपरिक मान्यता भी प्रचलित है कि भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त हो सकता है। विवाहित भक्त परिवार की सुख-शांति, दांपत्य जीवन और अपने प्रियजनों के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

Shravan Puja Vidhi

Shravan Puja Vidhi को घर पर सरल तरीके से भी किया जा सकता है।
सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।

इसके बाद दीपक और धूप जलाकर भगवान गणेश का स्मरण करें। फिर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। अपनी परंपरा के अनुसार दूध, बेलपत्र, फूल, चंदन, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है।

पूजा के दौरान Om Namah Shivaya का जाप, शिव चालीसा का पाठ या भगवान शिव से संबंधित स्तोत्रों का पाठ किया जा सकता है। अंत में शिव आरती करके परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
यदि घर पर पूजा की व्यवस्था करना कठिन हो, तो Bhaktinama के Online Puja Booking के माध्यम से पूजा सेवा की व्यवस्था की जा सकती है।

श्रावण में भगवान शिव को जल क्यों चढ़ाया जाता है?

भगवान शिव को जल अर्पित करना श्रावण मास की सबसे प्रमुख परंपराओं में से एक है।
इस परंपरा को समुद्र मंथन की कथा से भी जोड़ा जाता है, जिसमें भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया था। भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित करके भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं।

जल जीवन और शुद्धता का भी प्रतीक है। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाना भक्ति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की भावना को भी दर्शाता है।

श्रावण में बेलपत्र का महत्व

बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण पूजन सामग्रियों में से एक है। बेल के पेड़ की पत्तियां शिव पूजा में विशेष स्थान रखती हैं।

परंपरा में बेलपत्र की तीन पत्तियों को विभिन्न आध्यात्मिक प्रतीकों से जोड़ा जाता है। भक्त भगवान शिव का नाम लेते हुए श्रद्धा से बेलपत्र अर्पित करते हैं।

बेलपत्र चढ़ाते समय स्वच्छ और उचित पत्तियों का उपयोग करना तथा पेड़ को अनावश्यक नुकसान न पहुंचाना भी प्रकृति के प्रति सम्मान का हिस्सा है।

Shravan Vrat और उपवास की परंपरा

श्रावण मास में व्रत रखने की परंपरा बहुत प्रचलित है। कुछ भक्त प्रत्येक सोमवार को व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग श्रावण के विशेष दिनों या त्योहारों पर उपवास करते हैं।

क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार भक्त फल, दूध, व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थ या अन्य सात्त्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। कुछ लोग अधिक कठोर उपवास भी रखते हैं।

व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और आध्यात्मिक एकाग्रता को बढ़ाना भी माना जाता है। व्रत अपनी शारीरिक क्षमता और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

श्रावण मास में आने वाले प्रमुख त्योहार

श्रावण मास और इसके आसपास का समय कई महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों से जुड़ा होता है। क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार इनमें प्रमुख रूप से निम्न पर्व और व्रत शामिल हैं।

नाग पंचमी

Nag Panchami नाग देवता की पूजा को समर्पित पर्व है। यह श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है और प्रकृति तथा जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की हिंदू परंपरा को दर्शाता है।

रक्षाबंधन

Raksha Bandhan भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व है। बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुख-स्वास्थ्य की कामना करती हैं।

सावन सोमवार

श्रावण के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। Sawan Somwar इस पूरे महीने की सबसे लोकप्रिय धार्मिक परंपराओं में से एक है।

जन्माष्टमी

Krishna Janmashtami भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसकी वास्तविक तिथि क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार निर्धारित होती है और कई बार यह श्रावण के बाद आने वाले भाद्रपद काल के साथ जुड़ती है।

सावन में Kanwar Yatra

Kanwar Yatra सावन से जुड़ी प्रमुख धार्मिक यात्राओं में से एक है। कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करने के लिए तीर्थस्थलों की यात्रा करते हैं।

कई भक्त यह यात्रा पैदल पूरी करते हैं और रास्ते में भगवान शिव का नाम लेते हुए अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं।
Baba Baidyanath Dham, Deoghar Kanwar Yatra के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां भक्त पवित्र जल भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

श्रावण में Rudrabhishek का महत्व

Rudrabhishek भगवान शिव की विशेष पूजा विधि है और श्रावण मास में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
इस पूजा में शिवलिंग का विभिन्न पारंपरिक सामग्री से अभिषेक किया जाता है और मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। भक्त Rudrabhishek को शांति, आध्यात्मिक उन्नति, सुरक्षा और भगवान शिव के आशीर्वाद की कामना से करवाते हैं।
यदि आपके लिए मंदिर या घर पर पंडित की व्यवस्था करना कठिन है, तो Bhaktinama के Online Puja Booking के माध्यम से Rudrabhishek और अन्य धार्मिक सेवाओं की व्यवस्था की जा सकती है।

श्रावण में भगवान शिव को क्या अर्पित करें?

श्रावण में भगवान शिव को अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार विभिन्न वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। इनमें सामान्यतः शामिल हैं:

जल
बेलपत्र
फूल
दूध
चंदन
धूप
दीपक
फल
अक्षत
नैवेद्य

पारंपरिक रूप से अर्पित की जाने वाली अन्य पूजन सामग्री
पूजन सामग्री की परंपरा अलग-अलग स्थानों पर अलग हो सकती है। हिंदू पूजा परंपरा में श्रद्धा और भक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है।

यदि आवश्यक पूजन सामग्री की व्यवस्था करना मुश्किल हो, तो Online Puja Samagri Booking के माध्यम से पूजा की आवश्यक सामग्री मंगाई जा सकती है।

श्रावण मास में किन बातों का ध्यान रखें?

कई भक्त श्रावण के दौरान सात्त्विक जीवनशैली अपनाते हैं। वे अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं और पूजा-पाठ, स्वच्छता तथा संयम पर अधिक ध्यान देते हैं।

इस दौरान अच्छे आचरण, दूसरों के प्रति सम्मान, जीवों के प्रति करुणा और सकारात्मक सोच को भी महत्व दिया जाता है।
भोजन और व्रत से जुड़े नियम अलग-अलग समुदायों में अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक क्षेत्र की परंपरा को सभी के लिए अनिवार्य नियम मानने के बजाय अपने परिवार और समुदाय की परंपरा का पालन करना उचित है।

घर पर कैसे मनाएं Shravan Maas?

श्रावण मास मनाने के लिए बहुत बड़े आयोजन की आवश्यकता नहीं है। भक्त घर में भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर जल अर्पित कर सकते हैं और Om Namah Shivaya का जाप कर सकते हैं।
सोमवार के दिन विशेष पूजा, अभिषेक या शिव मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं। भक्त शिव से संबंधित कथाओं और स्तोत्रों का पाठ भी कर सकते हैं।

जो भक्त पूजा सामग्री आसानी से उपलब्ध कराना चाहते हैं, वे Online Puja Samagri Booking का उपयोग कर सकते हैं। वहीं Online Temple Booking के माध्यम से मंदिर से जुड़ी सेवाओं की व्यवस्था करना भी आसान हो सकता है।
श्रावण मास का आध्यात्मिक संदेश

श्रावण मास हमें केवल पूजा और व्रत का महत्व नहीं बताता, बल्कि त्याग, संयम, करुणा और आत्मअनुशासन का संदेश भी देता है।

भगवान शिव से जुड़ी कथाएं हमें दूसरों की रक्षा करने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने और अपने भीतर शांति बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं।

वर्षा ऋतु में प्रकृति का नया रूप भी श्रावण के संदेश से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। जिस प्रकार वर्षा धरती को नया जीवन देती है, उसी प्रकार श्रावण भक्तों को अपनी आध्यात्मिक यात्रा को फिर से मजबूत करने का अवसर देता है।

Bhaktinama के साथ मनाएं पवित्र Shravan Maas

श्रावण मास में पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों को सुविधाजनक बनाने के लिए Bhaktinama की विभिन्न सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। इनमें Online Puja Booking, Online Pandit Booking, Online Temple Booking और Online Puja Samagri Booking शामिल हैं।

चाहे आप भगवान शिव की विशेष पूजा करवाना चाहते हों, Rudrabhishek करवाना चाहते हों या पूजा की आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करना चाहते हों, Bhaktinama आपकी धार्मिक आवश्यकताओं को सुविधाजनक तरीके से पूरा करने में सहायता कर सकता है।


Shravana Maas, जिसे सावन के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र महीनों में से एक है। इस दौरान भक्त व्रत, पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप और मंदिर दर्शन के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
Sawan Somwar, Rudrabhishek, Kanwar Yatra, Nag Panchami और Raksha Bandhan जैसी धार्मिक परंपराएं इस समय को और भी विशेष बनाती हैं।

श्रावण का वास्तविक महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि भक्ति, आत्मसंयम, करुणा, सकारात्मकता और भगवान शिव के प्रति समर्पण में निहित है। चाहे पूजा घर पर सरल रूप से की जाए या मंदिर में विस्तृत अनुष्ठान के साथ, श्रद्धा और सच्ची भावना ही इस पवित्र महीने की सबसे बड़ी विशेषता है।