वरुथिनी एकादशी 2026: तिथि, महत्व, व्रत कथा और पूजा विधि

वरुथिनी एकादशी 2026: तिथि, महत्व, व्रत कथा और पूजा विधि
April 14, 2026
Spirituality
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वरुथिनी एकादशी 2026: तिथि, महत्व, व्रत कथा और पूजा विधि

जानिए वरुथिनी एकादशी 2026 की तिथि, महत्व, व्रत कथा, पूजा विधि और इस पवित्र एकादशी के धार्मिक लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है।
वरुथिनी एकादशी 2026: तिथि, महत्व, व्रत कथा और पूजा विधि

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों में वरुथिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से जीवन में सुख-समृद्धि, पापों से मुक्ति और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और पूरे दिन भक्ति व साधना में लीन रहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से मनुष्य को न केवल सांसारिक सुख प्राप्त होते हैं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।

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वरुथिनी एकादशी 2026 की तिथि

साल 2026 में वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त सूर्योदय से व्रत आरंभ करते हैं और अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करके व्रत का समापन करते हैं।

एकादशी का व्रत सही तिथि और समय पर करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है। कई भक्त इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं।

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वरुथिनी एकादशी का महत्व

“वरुथिनी” शब्द का अर्थ होता है रक्षा करने वाली या सुरक्षा देने वाली। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु भक्तों को हर प्रकार के संकट और नकारात्मक प्रभावों से बचाते हैं।

पुराणों में बताया गया है कि इस व्रत का फल अत्यंत महान होता है। कहा जाता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

यह व्रत व्यक्ति के मन को शुद्ध करता है और उसे आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसलिए कई लोग इस दिन ध्यान, पूजा और सेवा जैसे कार्यों में समय बिताते हैं।

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वरुथिनी एकादशी व्रत कथा

वरुथिनी एकादशी की कथा प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है। कथा के अनुसार एक समय राजा मान्धाता नाम के एक महान और धर्मपरायण राजा थे। वे अपने राज्य को न्याय और धर्म के अनुसार चलाते थे, लेकिन किसी कारणवश उन्हें जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

राजा ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की और उनसे अपने दुखों से मुक्ति का मार्ग पूछा। तब एक ऋषि ने उन्हें वरुथिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

राजा मान्धाता ने पूरे नियम और श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन किया। भगवान विष्णु की कृपा से उनके सभी कष्ट दूर हो गए और उनका जीवन फिर से सुख और समृद्धि से भर गया।

इस कथा से यह संदेश मिलता है कि सच्चे मन से किया गया वरुथिनी एकादशी का व्रत जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होता है।

वरुथिनी एकादशी की पूजा विधि

वरुथिनी एकादशी के दिन भक्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर पूजा की तैयारी की जाती है।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु को फूल, फल, धूप, दीप और विशेष रूप से तुलसी के पत्ते अर्पित किए जाते हैं क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।

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भक्त भगवान के मंत्रों का जाप करते हैं जैसे –
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

एकादशी के दिन व्रत रखा जाता है। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं जबकि कुछ फलाहार करते हैं। इस दिन चावल, गेहूं और अन्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता।

पूरे दिन भगवान का स्मरण, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान भी करते हैं।

व्रत के नियम

वरुथिनी एकादशी के व्रत में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। इस दिन अनाज, चावल और तामसिक भोजन का सेवन नहीं किया जाता।

इसके साथ ही व्यक्ति को अपने विचारों और व्यवहार में भी पवित्रता बनाए रखनी चाहिए। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान की भक्ति में समय बिताना चाहिए।

वरुथिनी एकादशी व्रत के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह व्रत पापों को नष्ट करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

इसके अलावा यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। भगवान विष्णु की कृपा से भक्तों को जीवन में आने वाली कठिनाइयों से भी रक्षा मिलती है।

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