May 30, 2026
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ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026: तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026: जानें ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की तिथि, पूर्णिमा तिथि का समय, पूजा मुहूर्त, धार्मिक महत्व और संपूर्ण पूजा विधि। साथ ही जानें कि भक्तिनामा की ऑनलाइन पंडित बुकिंग, ऑनलाइन पूजा बुकिंग, ऑनलाइन मंदिर बुकिंग और पूजा सामग्री बुकिंग सेवाएं इस पावन अवसर को श्रद्धापूर्वक और सुविधाजनक ढंग से मनाने में आपकी कैसे सहायता कर सकती हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा हर वर्ष नहीं आती, बल्कि केवल अधिक मास या पुरुषोत्तम मास में ही मनाई जाती है। यह अतिरिक्त चंद्र मास हिंदू धर्म में सौर और चंद्र कैलेंडर के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए समय-समय पर जोड़ा जाता है।
यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह पवित्र पुरुषोत्तम मास में आता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं, दान-पुण्य करते हैं, पूजा-पाठ में संलग्न होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति तथा समृद्धि के लिए भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
Bhaktinama online services के माध्यम से श्रद्धालु घर बैठे अनुभवी पंडित बुक कर सकते हैं, पूजा सामग्री मंगवा सकते हैं, online पूजा आयोजित कर सकते हैं और मंदिरों में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सकते हैं। इससे परिवार बिना किसी चिंता के पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-पाठ पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का महत्व
यह दिन हिंदू धर्म में अत्यंत आध्यात्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा, व्रत, दान और धार्मिक ग्रंथों का पाठ पापों एवं नकारात्मक कर्मों का नाश करता है, जीवन में सुख-समृद्धि लाता है और भगवान विष्णु के प्रति भक्ति को मजबूत बनाता है। पुरुषोत्तम मास में होने के कारण इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु सत्यनारायण कथा और विष्णु पूजा का आयोजन भी करते हैं। Bhaktinama की online services puja के माध्यम से परिवार योग्य एवं अनुभवी पंडितों से जुड़कर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न कर सकते हैं।
तिथि और पूर्णिमा का समय
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 मई 2026, सुबह 11:57 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 मई 2026, दोपहर 2:14 बजे
तिथि
शनिवार, 30 मई 2026 – पूर्णिमा व्रत
रविवार, 31 मई 2026 – उदया तिथि पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त
चूंकि पूर्णिमा तिथि दोपहर से पहले प्रारंभ होकर अगले दिन तक रहती है, इसलिए दोनों दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
प्रातःकालीन पूजा – 31 मई 2026
सूर्योदय से लगभग सुबह 10:00 बजे तक का समय विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा, दान-पुण्य और व्रत संबंधी अनुष्ठानों के लिए शुभ माना जाता है।
सायंकालीन चंद्र पूजा – 30 मई 2026
चंद्रमा का उदय लगभग शाम 6:40 बजे होने की संभावना है (स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है)। चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे मानसिक शांति तथा दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से मंदिर नहीं जा सकते, उनके लिए Bhaktinama online booking and online puja samagri प्रदान करता है, जिससे वे कहीं से भी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सकते हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूजा विधि
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
इसके बाद पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, धूप, घी का दीपक, फल और मिठाई अर्पित करें।
निम्न मंत्र का जाप करें:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता अथवा सत्यनारायण कथा का पाठ करें या श्रवण करें। दिन भर भगवान के नाम का स्मरण, भजन, ध्यान और सात्विक जीवनशैली का पालन करें।
पूजा की तैयारियों को सरल बनाने के लिए Bhaktinama's online puja samagri booking सेवा सभी आवश्यक पूजन सामग्री घर तक उपलब्ध कराती है, जिससे आपका धार्मिक अनुष्ठान अधिक सुगम और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक बनता है।
निष्कर्ष
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पुरुषोत्तम मास में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, दान-पुण्य करते हैं, व्रत रखते हैं और मन तथा आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं। यह पर्व भक्ति, आत्म-अनुशासन, करुणा और आध्यात्मिक उत्थान का संदेश देता है।
चाहे आप पंडित बुक करना चाहते हों, पूजा सामग्री मंगवाना चाहते हों, मंदिरों में विशेष पूजा करवाना चाहते हों या online puja में भाग लेना चाहते हों, Bhaktinama's online spiritual services इस पावन अवसर को श्रद्धा, सुविधा और पूर्ण वैदिक परंपरा के साथ मनाने में आपकी सहायता करती हैं।
यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह पवित्र पुरुषोत्तम मास में आता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं, दान-पुण्य करते हैं, पूजा-पाठ में संलग्न होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति तथा समृद्धि के लिए भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
Bhaktinama online services के माध्यम से श्रद्धालु घर बैठे अनुभवी पंडित बुक कर सकते हैं, पूजा सामग्री मंगवा सकते हैं, online पूजा आयोजित कर सकते हैं और मंदिरों में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सकते हैं। इससे परिवार बिना किसी चिंता के पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-पाठ पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का महत्व
यह दिन हिंदू धर्म में अत्यंत आध्यात्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा, व्रत, दान और धार्मिक ग्रंथों का पाठ पापों एवं नकारात्मक कर्मों का नाश करता है, जीवन में सुख-समृद्धि लाता है और भगवान विष्णु के प्रति भक्ति को मजबूत बनाता है। पुरुषोत्तम मास में होने के कारण इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु सत्यनारायण कथा और विष्णु पूजा का आयोजन भी करते हैं। Bhaktinama की online services puja के माध्यम से परिवार योग्य एवं अनुभवी पंडितों से जुड़कर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न कर सकते हैं।
तिथि और पूर्णिमा का समय
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 मई 2026, सुबह 11:57 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 मई 2026, दोपहर 2:14 बजे
तिथि
शनिवार, 30 मई 2026 – पूर्णिमा व्रत
रविवार, 31 मई 2026 – उदया तिथि पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त
चूंकि पूर्णिमा तिथि दोपहर से पहले प्रारंभ होकर अगले दिन तक रहती है, इसलिए दोनों दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
प्रातःकालीन पूजा – 31 मई 2026
सूर्योदय से लगभग सुबह 10:00 बजे तक का समय विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा, दान-पुण्य और व्रत संबंधी अनुष्ठानों के लिए शुभ माना जाता है।
सायंकालीन चंद्र पूजा – 30 मई 2026
चंद्रमा का उदय लगभग शाम 6:40 बजे होने की संभावना है (स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है)। चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे मानसिक शांति तथा दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से मंदिर नहीं जा सकते, उनके लिए Bhaktinama online booking and online puja samagri प्रदान करता है, जिससे वे कहीं से भी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सकते हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूजा विधि
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
इसके बाद पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, धूप, घी का दीपक, फल और मिठाई अर्पित करें।
निम्न मंत्र का जाप करें:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता अथवा सत्यनारायण कथा का पाठ करें या श्रवण करें। दिन भर भगवान के नाम का स्मरण, भजन, ध्यान और सात्विक जीवनशैली का पालन करें।
पूजा की तैयारियों को सरल बनाने के लिए Bhaktinama's online puja samagri booking सेवा सभी आवश्यक पूजन सामग्री घर तक उपलब्ध कराती है, जिससे आपका धार्मिक अनुष्ठान अधिक सुगम और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक बनता है।
निष्कर्ष
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पुरुषोत्तम मास में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, दान-पुण्य करते हैं, व्रत रखते हैं और मन तथा आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं। यह पर्व भक्ति, आत्म-अनुशासन, करुणा और आध्यात्मिक उत्थान का संदेश देता है।
चाहे आप पंडित बुक करना चाहते हों, पूजा सामग्री मंगवाना चाहते हों, मंदिरों में विशेष पूजा करवाना चाहते हों या online puja में भाग लेना चाहते हों, Bhaktinama's online spiritual services इस पावन अवसर को श्रद्धा, सुविधा और पूर्ण वैदिक परंपरा के साथ मनाने में आपकी सहायता करती हैं।